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9 वर्षों में 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ाया गया

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लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा, तकनीकी दक्षता और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। योगी सरकार ने कौशल विकास को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे रोजगार, उद्योग और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए प्रदेश के लाखों युवाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। प्रदेश सरकार की नीतियों का परिणाम है कि पिछले 9 वर्षों में लगभग 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

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इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, ऑटोमोबाइल, निर्माण, फैशन डिजाइनिंग, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, कृषि आधारित उद्योगों समेत कई क्षेत्रों को शामिल किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं में से 7.50 लाख से अधिक को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली।

“प्रोजेक्ट प्रवीण” के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख को कौशल प्रशिक्षण

योगी सरकार ने युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग से जोड़ा है। इसी क्रम में संचालित “प्रोजेक्ट प्रवीण” योजना युवाओं के बीच काफी प्रभावी साबित हुई है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न आधुनिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना है, ताकि वे डिग्री के साथ रोजगार के लिए भी पूरी तरह तैयार हों।

188 रोजगार मेलों से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार

प्रदेश सरकार ने रोजगार के अवसरों को युवाओं तक सीधे पहुंचाने के लिए मंडल और जनपद स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार मेलों का आयोजन भी किया। पिछले 9 वर्षों में आयोजित 188 वृहद रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। इन मेलों में देश की प्रतिष्ठित कंपनियों, औद्योगिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भाग लिया। इससे युवाओं को अपने ही प्रदेश में बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए और पलायन में भी कमी आई।

“स्किल कैपिटल” के रूप में पहचान मजबूत कर रहा यूपी

योगी सरकार का फोकस केवल नौकरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और मार्केट लिंकिंग उपलब्ध कराई जा रही है। यही कारण है कि प्रदेश में स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला राज्य है और यदि इस युवा शक्ति को कौशल और रोजगार से जोड़ा जाए तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है। योगी सरकार की नीतियों ने इसी सोच को जमीन पर उतारने का कार्य किया है। कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्योगों के विस्तार के समन्वय से उत्तर प्रदेश तेजी से “स्किल कैपिटल” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

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