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भागीरथपुरा मामला: हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश, टेंडर प्रक्रिया और प्रदूषण बोर्ड के दस्तावेज होंगे संरक्षित

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इंदौर
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में हाई कोर्ट का आदेश जारी हो गया है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का संपूर्ण रिकॉर्ड (टेंडर प्रक्रिया सहित) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इन दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से भी कहा कि उन्हें नगर निगम और शासन द्वारा 20 जनवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर अगर किसी तरह की आपत्ति है तो प्रस्तुत कर दें।

कोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर के साथ बनाई जाने वाली स्वतंत्र कमेटी के लिए याचिकाकर्ताओं से नाम मांगे हैं। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं में मंगलवार 20 जनवरी को करीब डेढ घंटे सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था जो बुधवार दोपहर जारी हुआ। तीन पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया के दस्तावेजों के साथ छोड़छाड़ की जा सकती है।
 
कोर्ट ने दिया दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश
याचिकाकर्ता ने ऐसी ही आशंका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उस रिपोर्ट के साथ होने की आशंका भी व्यक्त की है जिसमें पानी के नमूने दूषित पाए गए थे। ऐसी स्थिति में इन दस्तावजों को सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि वे इन दोनों दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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याचिकाकर्ता सुझाएं नाम
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने शासन द्वारा गठित समिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। शासन ने भागीरथपुरा मामले के लिए दोषी अधिकारियों का पता लगाने के लिए अधिकारियों की कमेटी बना दी है। यह जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने के लिए सिर्फ दिखावा है। कोर्ट ने आदेश में याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे कलेक्टर के साथ इस मामले की स्वतंत्र निगरानी के लिए बनाई जाने वाले कमेटी के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करें।

27 से पहले दे दें आपत्ति
शासन ने 20 जनवरी को हुई सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। बताया था कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। बुधवार को जारी आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि उन्हें अगर इस रिपोर्ट को लेकर किसी तरह की आपत्ति है तो वे इसे 27 जनवरी से पहले पेश कर दें।

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