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भीलवाड़ा में सैंडस्टोन खनन को मिलेगा बढ़ावा, सरकार को करोड़ों का राजस्व और युवाओं को रोजगार

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उदयपुर
राजस्थान के खनन क्षेत्र को धनतेरस पर बड़ी सौगात मिली है। भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया क्षेत्र में सैंडस्टोन (बुआनी पत्थर) खनन को विस्तार देने की तैयारी पूरी हो गई है। ब्रजपुरा में पहले नीलाम किए गए 5 प्लॉट्स की दोबारा नीलामी और आंटी गांव में 13 नए प्लॉट्स के ई-ऑक्शन का रास्ता साफ हो गया है। इस तरह कुल 18 प्लॉट्स की नीलामी से प्रदेश के खनन क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिलने के साथ स्थानीय युवाओं, श्रमिकों और खनन से जुड़े कारोबारियों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

ब्रजपुरा क्षेत्र में सैंडस्टोन के कुल 21 प्लॉट्स के प्रस्ताव तैयार कर पहले नीलामी विज्ञप्ति जारी की गई थी। इनमें से 12 प्लॉट्स की नीलामी से विभाग को 35 करोड़ 36 लाख 20 हजार 625 रुपए की रिकॉर्ड बोलियां मिली थीं। वहीं, 5 प्लॉट्स के उच्चतम बोलीदाताओं ने निर्धारित समय में 40 प्रतिशत प्रीमियम राशि जमा नहीं कराई। इस पर विभाग ने नियमानुसार उनकी अग्रिम राशि जब्त करने और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की।

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अब इन पांचों प्लॉट्स की आरक्षित दर संशोधित कर दोबारा नीलामी का प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया है। खनिज की उच्च गुणवत्ता और पूर्व में नीलाम हुए 12 प्लॉट्स की औसत बोली 2 करोड़ 62 लाख 83 हजार 289 रुपए प्रति हेक्टेयर को आधार बनाया गया है। इसके 75 प्रतिशत के हिसाब से नई आरक्षित दर 1 करोड़ 97 लाख 12 हजार 467 रुपए प्रति हेक्टेयर तय की गई है।

आंटी में नई बाउंड्री, 13 प्लॉट्स का सीमांकन
दूसरी ओर राजस्व ग्राम आंटी में सैंडस्टोन खनन के लिए नई बाउंड्री 'आंटी सी' बनाई गई है। पुरानी बाउंड्री के चालू ब्लॉक्स को छोड़कर शेष खारिज ब्लॉक्स में एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के 13 नए प्लॉट्स का सीमांकन किया गया है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार यहां जमीन की गहराई में पर्याप्त मात्रा में ब्लॉकेबल सैंडस्टोन मौजूद है। यह हल्के से गहरे मैरून और भूरे रंग का, महीन से मध्यम दानेदार, कठोर व सघन प्रकृति का है।

अरावली और पर्यावरण मानकों की पालना का दावा
खान विभाग के अनुसार दोनों क्षेत्रों में सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मानकों की पालना सुनिश्चित की गई है। फॉरेस्ट सर्वे रिपोर्ट और अरावली के पॉलीगन डेटा के मुताबिक ये क्षेत्र अरावली हिल्स में शामिल नहीं हैं। प्रतिबंधित दायरे से बाहर होने के साथ प्रस्तावित प्लॉट्स की 45 मीटर परिधि में सड़क, आबादी, मंदिर, नदी, नाला या अन्य सार्वजनिक संरचना भी नहीं है।

बिजौलिया क्षेत्र में कृषि के अलावा खनन और मजदूरी ही स्थानीय लोगों की आजीविका के प्रमुख साधन हैं। ऐसे में 18 प्लॉट्स की नीलामी से सरकारी खजाने को राजस्व मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
-महेश माथुर,एडीएम, खान विभाग

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