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चंबल में रेत उत्खनन पर रोक के दावे खोखले? कलेक्टर कार्यालय के पीछे निर्माण में रेत इस्तेमाल का आरोप

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चंबल से रेत उत्खनन पर रोक के दावे खोखले, कलेक्टर कार्यालय के पीछे निर्माण में रेत के इस्तेमाल का आरोप

रात में गश्त के दावों के बीच नदी से नहीं थम रहा अवैध उत्खनन, जलीय जीवों पर भी मंडरा रहा खतरा

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मुरैना
 चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने के प्रशासन के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। प्रशासन द्वारा अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई किए जाने और कलेक्टर-एसपी के रात में गश्त करने के दावों के बावजूद चंबल नदी से रेत का अवैध उत्खनन जारी होने के आरोप सामने आ रहे हैं।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कलेक्टर कार्यालय के पीछे चल रहे निर्माण कार्य में चंबल नदी की रेत के इस्तेमाल की बात सामने आई है। यदि निर्माण स्थल पर इस्तेमाल हो रही रेत चंबल नदी से लाई गई है, तो सवाल यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र से रेत निकालकर उसे शहर तक पहुंचाने वाला नेटवर्क आखिर प्रशासन की नजर से कैसे बच रहा है।

कलेक्टर की नाक के नीचे पहुंच रही चंबल की रेत

चंबल नदी से अवैध उत्खनन रोकने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की बात कही जाती है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय में कलेक्टर कार्यालय के पीछे चल रहे निर्माण कार्य तक चंबल की रेत पहुंचने के आरोप ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जिला मुख्यालय में ही ऐसी स्थिति है तो नदी के दूरस्थ घाटों और बीहड़ क्षेत्र में अवैध उत्खनन की निगरानी किस तरह हो रही है।

कार्रवाई के दावों के बीच जारी है रेत का खेल

चंबल नदी से रेत उत्खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद रेत माफिया द्वारा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों से रेत निकालने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और अन्य वाहन जब्त करने का दावा करता है, लेकिन कार्रवाई के बाद भी अवैध उत्खनन पूरी तरह रुकता नजर नहीं आ रहा है।

जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा

चंबल नदी राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नदी से अवैध तरीके से रेत निकालने से नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होने के साथ ही जलीय जीवों के जीवन पर भी खतरा पैदा होता है। खासकर घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों के प्रजनन स्थलों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन की सख्ती और रात में गश्त के दावों के बावजूद चंबल की रेत निर्माण स्थलों तक कैसे पहुंच रही है? क्या जिम्मेदार विभाग निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही रेत के स्रोत की जांच कराएंगे और अवैध रेत मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे?

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