Home अध्यात्म पितृ पक्ष में इन 4 कामों से करें परहेज, श्राद्ध-तर्पण के बाद...

पितृ पक्ष में इन 4 कामों से करें परहेज, श्राद्ध-तर्पण के बाद जरूर रखें सावधानी

1
0
Jeevan Ayurveda

 इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर, रविवार से होने जा रही है और समापन 10 अक्टूबर, शनिवार के दिन होगा. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाले इन 16 दिनों में पूर्वजों (पितरों) की आत्मा की शांति, तृप्ति और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए पिंड दान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज अदृश्य रूप में धरती पर आते हैं और परिजनों द्वारा दिए गए जल व अन्न को स्वीकार करते हैं. हालांकि, कई बार लोग विधि-विधान से पूजा और श्राद्ध तो कर लेते हैं, लेकिन उसके बाद कुछ अनजानी गलतियां कर बैठते हैं. ज्योतिष और शास्त्र नियमों के अनुसार, तर्पण या श्राद्ध पूजा के तुरंत बाद की गई 4 गलतियां आपकी पूरी पूजा का फल निष्फल कर सकती हैं और पितृ दोष का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि पितरों की पूजा के बाद किन 4 कामों से सख्त परहेज करना चाहिए.

Ad

तर्पण के तुरंत बाद भोजन करना या भोजन में जल्दबाजी
श्राद्ध या तर्पण की पूजा संपन्न होने के तुरंत बाद स्वयं भोजन करने बैठ जाना सही नहीं माना जाता है. जब तक ब्राह्मणों को भोजन न करा दिया जाए और पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी) के लिए भोजन का अंश न निकाल दिया जाए, तब तक गृहस्थ को स्वयं भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए. पितरों और पंचबलि को भोजन अर्पण के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें.

लहसुन-प्याज और तामसिक पदार्थों का सेवन
तर्पण या श्राद्ध कर्म करने के बाद भी पूरे पितृ पक्ष के दौरान घर का माहौल और भोजन सात्विक होना चाहिए. श्राद्ध पूजा के बाद भूलकर भी शराब, मांस-मदिरा या लहसुन-प्याज से युक्त तामसिक भोजन का सेवन न करें. ऐसा करने से पितर रुष्ट हो सकते हैं और घर की सुख-शांति प्रभावित हो सकती है.

घर में क्लेश, गुस्सा या किसी का अनादर करना
पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में घर के आसपास ही मौजूद रहते हैं. तर्पण के बाद घर में कटु शब्द बोलना या अशांति फैलाना नकारात्मक ऊर्जा लाता है. श्राद्ध पूजा के बाद विशेष रूप से क्रोध, अहंकार और घर के सदस्यों या बुजुर्गों से वाद-विवाद करने से बचें. इसके अलावा, द्वार पर आए किसी भी गरीब, असहाय व्यक्ति या पशु-पक्षी को डांटकर न भगाएं, उन्हें अन्न-जल जरूर दें.

बाल-दाढ़ी कटवाना या नए वस्त्र-सामग्री की खरीदारी
हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष को संयम, साधना और पूर्वजों के प्रति आदर व्यक्त करने का समय माना गया है, न कि भौतिक उत्सव या साज-सज्जा का. तर्पण और श्राद्ध पूजा वाले दिन बाल, नाखून या दाढ़ी कटवाने से बचना चाहिए. साथ ही, पूजा के तुरंत बाद नए कपड़े, वाहन या प्रॉपर्टी जैसी भौतिक सुख-सुविधाओं की खरीदारी या किसी नए मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से परहेज करें.

श्राद्ध पूजा का पूर्ण फल पाने का सबसे आसान तरीका
पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान के बाद अपने हाथों से गाय को हरा चारा या गुड़-रोटी, कौवे और कुत्ते को भोजन का अंश जरूर दें. कौवे को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है, इसलिए उनके माध्यम से पहुंचाया गया अन्न सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है. इसके बाद निष्काम भाव से पितरों से परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें.

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here