नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस के 15,000 जवानों और अर्ध सैनिक बलों की 200 कंपनी तैनात की गई हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में शनिवार से 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
ब्रिक्स को लेकर दिल्ली में पहरा
दिल्ली यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिखर सम्मेलन के मद्देनजर पूरी दिल्ली बंद नहीं होगी लेकिन वीवीआईपी के काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी रूप से ट्रैफिक को रोका जा सकता है। कुछ जगहों पर रूट डायवर्जन किया जा सकता है और कुछ रास्तों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
VVIP मूवमेंट को लेकर खास तैयारी
अधिकारियों के अनुसार जहां सुरक्षा व्यवस्था अनुमति देगी, वहां यातायात सामान्य रूप से जारी रहेगा। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के काफिले के गुजरने के दौरान आम वाहनों पर लगने वाली रोक की कोई निश्चित अवधि नहीं होगी। सुरक्षा स्थिति और परिस्थितियों के आधार पर वाहनों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि व्यवस्था इस तरह की गई है कि विदेशी मेहमानों की कड़ी से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था हो और आम जनता को कम से कम परेशानी हो।
ट्रैफिक एडवाइजरी देखकर ही घर से निकलें
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमने इसे ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं कि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो। यातायात व्यवस्था को लेकर पहले ही एडवाइजरी जारी की जा चुकी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन में भाग के लिए शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंच गए। वहीं चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की है। यह सात साल के अंतराल के बाद भारत की उनकी पहली यात्रा होगी।
दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली में
सम्मेलन में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, अबू धाबी के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख आदि शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने आवाजाही के लिए चिह्नित मार्गों का व्यापक निरीक्षण किया है। कई सरकारी एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ समन्वय संबंधी बैठकें भी की गई हैं।
सुरक्षा ऐसी, परिंदा भी न मार सके पर
सुरक्षा व्यवस्था हवाई अड्डे, विदेशी नेताओं को ठहराए जाने वाले होटलों, भारत मंडपम और उन अन्य स्थानों तक रहेगी जहां ये विदेशी मेहमान जाएंगे। नई दिल्ली इलाके में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों के अलावा चेहरे की पहचान करने वाली प्रणाली और वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। सम्मेलन स्थल और विदेशी मेहमानों को ठहराए जाने वाले होटलों में प्रवेश नियंत्रण, पहचान सत्यापन, खुफिया जानकारी जुटाने, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
इन रास्तों से बचकर
यातायात पुलिस के अनुसार शिखर सम्मेलन के दौरान 35 से अधिक सड़कें प्रभावित हो सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से मथुरा रोड, सरदार पटेल मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोका रोड ,बाराखंभा रोड ,टॉल्स्टॉय मार्ग ,अफ्रीका एवेन्यू रोड, नीति मार्ग, पंचशील मार्ग, एपीजे अब्दुल कलाम रोड शामिल हैं। साकेत स्थित होटल से मध्य दिल्ली के बीच मिस्र के प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही के कारण दक्षिणी दिल्ली की सड़कों पर खासकर व्यस्त समय में यातायात का दबाव और बढ़ सकता है।
हाई-सिक्योरिटी मूवमेंट को लेकर बड़ी तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन के बड़े स्तर को देखते हुए हर दिन कई बार ‘हाई-सिक्योरिटी मूवमेंट’ होंगे। किसी विदेशी नेता को हवाई अड्डे से होटल, होटल से सम्मेलन स्थल और वहां से द्विपक्षीय बैठकों या अन्य कार्यक्रमों में ले जाने के दौरान एक दिन में पूरे शहर में करीब 70-80 या उससे अधिक ‘हाई-सिक्योरिटी मूवमेंट’ हो सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हर वीवीआईपी अवागमन के लिए अलग से यातायात नियंत्रण, रास्तों पर प्रवेश प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन में समन्वय करना पड़ता है और इसी वजह से आम लोगों और यात्रियों पर इसका असर सामान्य वीआईपी दौरे की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।









