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‘भारत महाशक्ति नहीं, विश्वगुरु बना’, टोरंटो में मोहन भागवत ने बताया भारत की परंपरा और स्वभाव

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रांची
 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-मित्रता के साथ विश्व को अपनाएं’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश दिया।

कहा, जब भी दुनिया में कहीं भी भारत से सहायता मांगी गई है, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि, बिना मांगे भी भारत ने हमेशा सहायता का हाथ बढ़ाया है। यही भारत की परंपरा और उसका स्वभाव है।

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एक समय भारत को महाशक्ति कहा जा सकता था, लेकिन उस समय भारत महाशक्ति नहीं था। उसने दुनिया पर शासन नहीं किया, बल्कि विश्व की सेवा की। अपने चरित्र और आचरण के बल पर भारत ‘विश्वगुरु’ बना, ‘महाशक्ति’ नहीं। इसलिए, भारत का उदय वास्तव में मानवता के अधिक एकजुट और अधिक मुक्त होने का प्रतीक है।

कनाडा के हिंदू समुदाय के इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश के सभी दस प्रांतों से 2,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका के न्यूयार्क के बाद मोहन भागवत रविवार को कनाडा के टोरंटो पहुंचे।

भारतीय समयानुसार रविवार की रात्रि 2.30 बजे के बाद कार्यक्रम का आयोजन कनाडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलाग की ओर से किया गया था।

आयोजन को कनाडा के 175 से अधिक संगठनों का समर्थन प्राप्त था। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू समुदाय के बीच आपसी संवाद और अपनत्व को मजबूत करने के साथ कनाडाई समाज में सकारात्मक एवं रचनात्मक योगदान को बढ़ावा देना था।

आयोजन का मूल भाव हिंदू सभ्यता के शाश्वत आदर्श ‘वसुधैव कुटुंबकम—संपूर्ण विश्व एक परिवार है’ पर आधारित रहा।

विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहयोग पर जोर
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने हिंदू पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के बीच पारस्परिक सम्मान, संवाद और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने हिंदू समाज की व्यापक वैश्विक भूमिका और समाज के प्रति जिम्मेदारी के संदर्भ में अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर और कनाडा के पूर्व संघीय कैबिनेट मंत्री जेसन केनी रहे। सार्वजनिक जीवन में केनी ने कनाडा के विभिन्न सांस्कृतिक समुदायों के साथ संवाद तथा कनाडा-भारत संबंधों से जुड़े विषयों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।

वहीं, खालसा दीवान सोसाइटी और ऐतिहासिक रास स्ट्रीट गुरुद्वारा का प्रतिनिधित्व करने वाले कश्मीर सिंह धालीवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति को कनाडा में हिंदू और सिख समुदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण और मजबूत संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा गया।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विविधता से भरे कनाडाई समाज में सभी समुदाय आपसी सम्मान और सहयोग की भावना के साथ देश की प्रगति में योगदान दें।

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