भोपाल
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देशन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संगठित एवं अंतर्राज्यीय अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में राजगढ़ पुलिस ने ऑपरेशन मनीट्रेप के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए पैसे दोगुने करने का झांसा देकर लगभग 2 करोड़ रूपए की धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 1 करोड़ 73 लाख रूपए नगद, 04 चार पहिया वाहन एवं 19 एंड्रॉयड मोबाइल सहित लगभग 2 करोड़ 92 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है।
24 जुलाई को ब्यावरा निवासी फरियादी द्वारा थाना ब्यावरा शहर में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि आरोपियों ने स्वयं को बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की राशि दोगुनी करने का लालच दिया। आरोपियों ने फर्जी ई-मेल, दस्तावेज एवं भुगतान संबंधी संदेश दिखाकर फरियादी का विश्वास हासिल किया और 2 करोड़ निवेश करने पर अधिक राशि वापस मिलने का झांसा दिया।
आरोपियों द्वारा भोपाल में फरियादी से 2 करोड़ रूपए की नगद राशि प्राप्त की गई। इसके बाद उसे हवाला/आंगड़िया के माध्यम से राशि भेजने तथा भुगतान किए जाने का विश्वास दिलाने के लिए 4 करोड़ रूपए के RTGS का फर्जी स्क्रीन शॉट दिखाया गया। राशि वापस नहीं मिलने पर फरियादी को धोखाधड़ी का पता चला। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजगढ़ द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी एवं ठगी की राशि की बरामदगी के लिए 10 विशेष टीमों का गठन किया गया।
10 राज्यों में करीब 30 हजार किलोमीटर तक पुलिस की लगातार कार्रवाई
राजगढ़ पुलिस की टीमों ने आरोपियों के मूवमेंट एवं आपसी कनेक्शन की कड़ियां जोड़ने के लिए 3,000 से अधिक CCTV फुटेज का विश्लेषण किया। पुलिस टीमों ने लगभग 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए करीब 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई की तथा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा सहित 10 राज्यों में दबिश देकर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से कई स्तरों पर काम करता था। पहले ऐसे लोगों की पहचान की जाती थी, जिन्हें निवेश के नाम पर बड़ी राशि लगाने के लिए तैयार किया जा सके। इसके बाद बड़ी कंपनी का नाम, महंगी गाड़ियां, होटल में बैठक एवं व्यवस्थित दस्तावेजों के माध्यम से पीड़ित का विश्वास जीता जाता था। इसके बाद फर्जी ई-मेल, स्वीकृति-पत्र एवं भुगतान संदेशों के माध्यम से निवेश को वास्तविक बताया जाता था। पीड़ित से अधिकतम राशि नकद में प्राप्त करने के बाद उसे हवाला अथवा आंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तियों एवं शहरों तक पहुंचाया जाता था। राशि प्राप्त होने के बाद गिरोह के सदस्य आपस में रकम बांटकर अपने ठिकाने, मोबाइल नंबर एवं शहर बदल देते थे।
गिरोह की विशेष कार्यप्रणाली यह थी कि प्रत्येक लिंक पर आरोपी अपना वास्तविक नाम छिपाकर ट्रेड नाम का उपयोग करते थे। गिरोह में प्रत्येक व्यक्ति सामान्यतः अपने से ऊपर एवं नीचे की लिंक से ही संपर्क में रहता था, जिससे पूरी नेटवर्क संरचना की जानकारी किसी एक व्यक्ति को नहीं होती थी।
फर्जी कंपनी प्रतिनिधियों से लेकर आंगड़िया नेटवर्क तक फैला था नेटवर्क
जांच में सामने आया कि गिरोह के कुछ सदस्य कंपनी कर्मचारी एवं एजेंट के रूप में पीड़ित की पहचान एवं संपर्क स्थापित करने का कार्य करते थे, जबकि अन्य सदस्य कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट, डायरेक्टर एवं अन्य प्रतिनिधियों के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर निवेश योजना को विश्वसनीय बताते थे।
भोपाल एवं ब्यावरा के होटलों में बैठकों के माध्यम से पीड़ित को निवेश के लिए तैयार किया गया। इसके बाद भोपाल के जहांगीराबाद स्थित एक कोरियर कार्यालय पर पीड़ित से 2 करोड़ की नकद राशि प्राप्त की गई। गिरोह के सदस्यों ने राशि प्राप्त करने के बाद 4 करोड़ के RTGS का फर्जी स्क्रीन शॉट दिखाकर पीड़ित को भ्रमित किया और मौके से फरार हो गए। जांच में यह भी सामने आया कि राशि प्राप्त होने के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों द्वारा इसे महाराष्ट्र सहित विभिन्न स्थानों पर पहुंचाने, बांटने एवं खपाने का कार्य किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरोह द्वारा इंदौर में भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी की योजना बनाई गई थी, जिसे राजगढ़ पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के कारण अंजाम नहीं दिया जा सका। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा पश्चिम बंगाल में लगभग 50 लाख रूपए तथा दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी के साथ भी लगभग 50 लाख की धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरोह से जुड़े व्यक्तियों के कार्यालय उदयपुर, पश्चिम बंगाल, इंदौर, भोपाल, दिल्ली एवं मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर संचालित होने की जानकारी प्राप्त हुई है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों, फर्जी कंपनियों एवं ई-मेल के संचालन, हवाला/आंगड़िया नेटवर्क, बैंक खातों तथा ठगी की राशि के लेन-देन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। जप्त मोबाइल एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच भी जारी है।
अंतर्राज्यीय समन्वय से मिली सफलता
इस पूरी कार्रवाई में राजगढ़ पुलिस की विशेष टीमों के साथ मुंबई, नांदेड़, लातूर, भदोही, पुणे, हैदराबाद, केरल, तेलंगाना एवं भोपाल सहित विभिन्न स्थानों की पुलिस इकाइयों ने आरोपियों की गिरफ्तारी एवं ठगी की राशि की बरामदगी में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि कम समय में पैसा दोगुना करने, अत्यधिक लाभ देने अथवा किसी बड़ी कंपनी के नाम पर निवेश का लालच देने वाले व्यक्तियों पर विश्वास न करें। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले संबंधित कंपनी, व्यक्ति एवं योजना का आधिकारिक माध्यम से सत्यापन अवश्य करें। संदिग्ध गतिविधि अथवा धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें।









