Home मध्य प्रदेश चुरहट तक पहुँची रेल — यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे...

चुरहट तक पहुँची रेल — यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे विंध्य की उपलब्धि है, हमे श्रेय नही रेल चाहिए

1
0
Jeevan Ayurveda

सिंगरौली

ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन का सपना कई दशकों से देखा जा रहा था। यह सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है। जनता पार्टी सरकार के समय सांसद लक्ष्मीनारायण नायक ने तत्कालीन रेल मंत्री मधु दंडवते के समक्ष इसके सर्वे की मांग उठाई। मध्यप्रदेश में सुंदरलाल पटवा जी के मुख्यमंत्री रहते भी इस रेल परियोजना के लिए विधानसभा स्तर पर प्रस्ताव/संकल्प का उल्लेख मिलता है।

Ad

इसके बाद कुंवर अर्जुन सिंह जी, गोविंद मिश्रा जी, रीति पाठक जी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर इस मांग को आगे बढ़ाया। सभी ने अपने-अपने स्तर पर प्रयास किए। आज उसी लंबे संघर्ष और प्रयास का परिणाम है कि ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन चुरहट तक पहुँच चुकी है और अब सीधी तक ट्रेन आने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

सीधी सांसद एवं मेरे पिता जी डॉ. राजेश मिश्रा ने एक संकल्प लिया था कि “जब तक सीधी में ट्रेन नहीं आएगी, मैं माला नहीं पहनूँगा।” यह एक प्रतीकात्मक संदेश है, लेकिन इसके पीछे उनका दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास दिखाई देता है।

पापा का सुबह 5 बजे उठना और रात 12 बजे तक लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहना, जनता की समस्याओं को सुनना और उन्हें संसद तक पहुँचाना—यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। पिछले दो वर्षों में उन्होंने कम से कम 10 बार लोकसभा में ट्रेन और रेलवे से जुड़े सवाल उठाए हैं। चाहे ट्रेन से संबंधित लोगों के रोजगार का मामला हो या बन रहे रेलवे स्टेशन की छतों में पानी टपकने का मामला हो या खराब निर्माण का, ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन के मुद्दे पर उन्होंने लगातार सवाल उठाए हैं।

ऐसे ही सीधी सिंगरौली की सड़क जो दिवास्वप्न हो चुकी है, पहले उसे MPRDC से NHAI में कन्वर्ट करा के पुनः टेंडर करना, और जल्दी काम चालू करने के लिए स्थानीय प्रशासन और ठेकेदार पर जोर डालना, क्योंकि सभी सत्ताधीश जनप्रतिनिधिओ का भी उसी सड़क से आना जाना होता है, न बन पाने की कसक सबको होगी।

जनता ने बीच-बीच में यह भी कहा कि डॉ. राजेश मिश्रा फोटो खिंचवाने वाले नेता हैं। जनता का यह कहना भी अपने स्थान पर स्वाभाविक था। क्योंकि जब हमारी मांग पूरी नहीं होती, तो जनता प्रतिकार करती है, सवाल पूछती है और विरोध भी करती है। इसका अर्थ यह नहीं कि जनता किसी व्यक्ति का विरोध कर रही है; यह अपने अधिकार और अपनी अपेक्षाओं की आवाज है।

लेकिन यह भी सच है कि ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह कई दशकों से जनता की मांग रही है और अनेक जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए प्रयास किए हैं। इसलिए आज जब चुरहट तक ट्रेन पहुँची है, तो उन सभी लोगों को साधुवाद मिलना चाहिए जिन्होंने कभी न कभी, किसी न किसी रूप में इसके लिए प्रयास किया—चाहे वह प्रयास दिखने वाला रहा हो या पर्दे के पीछे।

1947 में देश आजाद हुआ और इतने वर्षों बाद अगर हमारी ट्रेन सीधी की धरती पर आ रही है, तो यह सवाल भी हमेशा रहेगा कि आखिर इतने वर्षों तक हमें इसके लिए इंतजार क्यों करना पड़ा? नैतिक रूप से हर उस जनप्रतिनिधि को यह सवाल स्वयं से पूछना होगा कि प्रयासों में कहाँ कमी रह गई, जनता की आवाज ऊपर तक पहुँचाने में कहाँ कमी रह गई, अपना पक्ष और अपना प्रेजेंटेशन प्रभावी ढंग से रखने में कहाँ कमी रह गई, या फिर बजट और प्राथमिकता के स्तर पर कहाँ कमी रह गई।

यह सवाल किसी एक पार्टी का नहीं है। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा—किसी न किसी दौर में यह कमी जरूर रही होगी। क्योंकि सीधी और सिंगरौली कोई साधारण क्षेत्र नहीं हैं। सीधी सिद्धभूमि है और सिंगरौली देश की ऊर्जाधानी है। ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को रेल कनेक्टिविटी के लिए इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, यह प्रश्नचिह्न हमेशा रहेगा।

हमारे विंध्य के नेताओं में भी कहीं न कहीं यह सवाल रहेगा कि जिस तरह बिहार, ओडिशा या देश के दूसरे क्षेत्रों के नेता अपनी जनता के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव, शक्ति और दम-खम का इस्तेमाल करते हैं, उस तरह का सामूहिक दबाव हमारे क्षेत्र से क्यों नहीं बन पाया?

लेकिन कहते हैं न—जिसके भाग्य में सेहरा बंधना लिखा होता है, प्रकृति और प्रभु उसके सिर पर सेहरा बाँध ही देते हैं।

आज चुरहट तक ट्रेन आ गई है। इस उपलब्धि के लिए वर्तमान सांसद डॉ. राजेश मिश्रा साधुवाद के पात्र हैं। और उनके साथ वे सभी पूर्व जनप्रतिनिधि भी साधुवाद के पात्र हैं जिन्होंने इस सपने को जीवित रखा और इसके लिए प्रयास किए।

आज ट्रेन आई है, तो सबसे पहले बधाई जनता को।
क्योंकि यह जनता की वर्षों पुरानी मांग और संघर्ष का परिणाम है।

और बधाई हमारे वर्तमान सांसद डॉ. राजेश मिश्रा को भी—जिन्होंने पिछले दो वर्षों में इस मुद्दे को लगातार उठाया, इसे अपना ध्येय बनाया और आज चुरहट तक ट्रेन आने के इस पड़ाव तक इसे पहुँचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

अब अगला लक्ष्य सीधी है।

उम्मीद है कि जिस गति से रेल चुरहट तक पहुँची है, उसी गति से जल्द ही सीधी तक भी ट्रेन पहुँचेगी।

सीधी सिंगरौली में अनगिनत कार्य अभी भी अधूरे है जब सभी जनप्रतिनिधि एकसाथ मिलकर मांग उठाएंगे तभी विकास संभव है, इसी तारतम्य में पिता जी अभी हाल ही में सभी चुने हुए सत्ता संगठन के जनप्रतिनिधियों के साथ माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से मिले थे।

यह किसी एक नेता की जीत नहीं—यह सीधी की जनता के सपने की जीत है।
यह विंध्य की जीत है।

यह उन सभी पीढ़ियों के संघर्ष की जीत है, जिन्होंने इस रेल का सपना देखा था।

चुरहट तक रेल आने पर सीधी-सिंगरौली की जनता को बहुत-बहुत बधाई।

अब इंतजार सिर्फ चुरहट से सीधी और सीधी से सिंगरौली का है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here