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UGC-NET 2026: तीन विषयों की परीक्षा रद्द, 9-10 सितंबर को होगा री-एग्जाम

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UGC-NET 2026 की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है और इसको दोबारा से 9 और 10 सितंबर के बीच कराया जाएगा. हालांकि, पहले इसका आयोजन 22 से 30 अगस्त के बीच किया गया था. परीक्षा के रद्द करने की सबसे बड़ी वजह थी सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स के पेपर में कई गलतियां. लगातार छात्रों की शिकायत के बाद NTA ने इन तीनों विषयों की परीक्षा रद्द कर दी है, इन पेपरों में कई सारी स्पेलिंग मिस्टेक, उलटे-सीधे नाम और पिछले सालों के पेपर से जुड़े सवाल शामिल थे l  

शिकायतों के बाद बनी कमेटी
30 जून को हुई समाजशास्त्र की परीक्षा उस समय विवादों में आ गई जब उम्मीदवारों ने प्रश्नपत्र में कई वर्तनी और व्याकरण की गलतियों के साथ-साथ खराब हिंदी अनुवाद और सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे जाने का आरोप लगाया.  उम्मीदवारों का कहना था कि गलतियां सिर्फ टाइपिंग तक सीमित नहीं थीं बल्कि समाजशास्त्र के प्रमुख विचारकों के नाम भी गलत लिखे गए थे. मामले बढ़ने पर NTA ने शिकायतों के बाद जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई. कमेटी की आरोपों को सही पाया गया. इसके बाद एजेंसी के पास परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई और दूसरा रास्ता नहीं बचा. उससे भी ज्यादा खास बात है कि इसके लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं दी जाएगी l

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कब होगा वापस से पेपर?
गलतियों की पुष्टि होने के बाद NTA ने नए तारीखों और नया शेड्यूल जारी कर दिया है.

9 सितंबर (सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे): इंग्लिश का पेपर होगा.

9 सितंबर (दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे): कॉमर्स का पेपर होगा.

10 सितंबर (सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे): सोशियोलॉजी का पेपर लिया जाएगा.

सोशियोलॉजी
सोशियोलॉजी की परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को जाने-माने विद्वानों के नाम तक गलत मिले. कई जगह टाइपिंग और स्पेलिंग की इतनी गलतियां थीं कि प्रश्न को समझना ही मुश्किल हो रहा था. मसलन, Ritzer का नाम ‘Putzer’, Ghurye को ‘Ghunye’, Parsons को ‘Parsow’ और Nussbaum को ‘Nusbaut’ लिखा गया था l  

इंग्लिश
वहीं, इंग्लिश का पेपर देखने के बाद उम्मीदवार पूरी तरह से हैरान रह गए. पेपर देखने के बाद ऐसा लग रहा था कि मानो साल 2024 और 2025 नेट एग्जाम के सवालों को ही छाप दिया गया है. बात यही पर खत्म नहीं होती है बल्कि मल्टीपल-चॉइस ऑप्शंस का सीक्वेंस भी वही का वही था. इकोक्रिटिसिज्म और फ्लैनर जैसे कॉन्सेप्ट्स पर बेस्ड सवाल हों या विलियम शेक्सपियर के नाटकों का क्रोनोलॉजिकल सब पुराना ही लग रहा था l

कॉमर्स
कॉमर्स के पेपर का हाल भी इंग्लिश की तरह ही था. इसमें भी कई सवाल पिछले सालों के पेपर से आए थे. कैपिटल स्ट्रक्चर थ्योरी (जैसे मोदिग्लियानी-मिलर हाइपोथीसिस) और सर्विस मार्केटिंग के ‘7 Ps’ के विषयों से जुड़े सवालों में भी ऑप्शंस का वही क्रम देखने को मिला l

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