Home ट्रेंडिंग फ्रोजन फूड पर बड़ा सवाल! 16 लोग हुए डायबिटीज के शिकार, 11...

फ्रोजन फूड पर बड़ा सवाल! 16 लोग हुए डायबिटीज के शिकार, 11 कंपनियां कानूनी कार्रवाई के घेरे में

2
0
Jeevan Ayurveda

नई दिल्ली

अमेरिका में एक 18 वर्षीय युवक ने 11 बड़ी फूड कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर कर पूरी दुनिया में फ्रोजन और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर नई बहस छेड़ दी है. युवक का आरोप है कि बचपन से ऐसे खाने की चीजों की वजह से उसे महज 16 साल की उम्र में टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियां हो गईं. इस मामले के सामने आने के बाद अमेरिका में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और फ्रोजन फूड की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भारत में तेजी से बढ़ रहा फ्रोजन फूड बाजार भी भविष्य में ऐसी चिंता की वजह बन सकता है?

Ad

कैसे सामने आया मामला?

 रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पेंसिल्वेनिया निवासी ब्राइस मार्टिनेज  को 16 साल की उम्र में अचानक सीने के पास तेज दर्द महसूस हुआ. शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद अस्थमा का दौरा पड़ रहा है, लेकिन स्कूल की नर्स ने जब उनका ब्लड प्रेशर जांचा तो स्थिति गंभीर निकली. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर डिजीज है. ब्राइस के लिए यह खबर चौंकाने वाली थी. बचपन से उनका वजन ज्यादा जरूर था, लेकिन इसके अलावा उन्हें कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या महसूस नहीं हुई थी. उन्हें यह भी नहीं पता था कि कम उम्र में भी टाइप-2 डायबिटीज हो सकती है।  

बीमारी के बारे में जानकारी जुटाया
बीमारी का पता चलने के बाद उन्होंने इंटरनेट पर अपनी बीमारी से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की. इसी दौरान उन्हें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, बच्चों को टारगेट करके किए जाने वाले फूड मार्केटिंग और खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले नमक, चीनी, फैट और एडिटिव्स के बारे में जानकारी मिली. उनका कहना है कि बचपन में उनके खाने का बड़ा हिस्सा ऐसे ही पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट उत्पादों से जुड़ा था. सुबह मीठे सीरियल, स्कूल में पिज्जा, बर्गर और मैकरोनी, जबकि घर लौटने पर माइक्रोवेव में तैयार होने वाला पैक्ड खाना उनकी डेली रूटीन का हिस्सा था। 

11 कंपनियों के खिलाफ मुकदमा किया
18 साल की उम्र में उन्होंने 11 बड़ी फूड कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया. इनमें क्राफ्ट हेंज, कोका-कोला, पेप्सिको और नेस्ले यूएसए जैसी कंपनियां शामिल हैं. उनका आरोप है कि कंपनियों ने बच्चों को ध्यान में रखकर ऐसे उत्पाद तैयार किए और उनका प्रचार किया, जिनके लगातार सेवन से उनकी सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हुई. इसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से जुड़ा पहला पर्सनल इंजरी मुकदमा माना जा रहा है. इसके बाद अमेरिका में इसी तरह के कई अन्य मामले भी सामने आए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों ने कम उम्र में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाया। 

भारत में क्या है स्थिति?
अमेरिका में चल रही बहस के बीच भारत में भी फ्रोजन फूड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. कभी सिर्फ खास मौकों पर खरीदे जाने वाले फ्रोजन उत्पाद अब धीरे-धीरे रोजमर्रा की रसोई का हिस्सा बनते जा रहे हैं. फ्रोजन मोमोज, नगेट्स, फ्राइज, कबाब, बर्गर पैटी और रेडी-टू-कुक स्नैक्स अब बड़ी संख्या में घरों के फ्रीजर में जगह बना रहे हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह तेजी से बदलती लाइफस्टाइल मानी जा रही है. कामकाजी परिवारों की संख्या बढ़ने, समय की कमी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की आसान उपलब्धता के कारण लोग ऐसे विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं, जिन्हें कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सके। 

fortuneindia की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट रिसर्च फ्यूचर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फ्रोजन फूड बाजार 2025 से 2035 के बीच औसतन 14.5 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है. वहींमिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज का कहना है कि कोल्ड-चेन और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ने से इस सेक्टर का विस्तार हो रहा है और उत्पादों की उपलब्धता भी पहले से बेहतर हुई है। 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here