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मुख्य सचिव का आदेश, सुरक्षित प्रसव के लिए मजबूत होगा रेफरल सिस्टम

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जयपुर
 मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए रेफरल परिवहन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सुरक्षित प्रसव एवं जननी एक्सप्रेस सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों सहित परिपत्र जारी करने को कहा। साथ ही निर्देश दिए कि उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए संभावित प्रसव तिथि से एक-दो दिन पूर्व ही उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाए।

मुख्य सचिव शनिवार को स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, अस्पताल अधीक्षकों, संयुक्त निदेशकों, पीएमओ, आरसीएचओ एवं सीएमएचओ के साथ सुरक्षित मातृत्व सेवाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया (सीवियर एनीमिया) के मामलों में कमी आने तथा उन्हें माइल्ड एनीमिया श्रेणी में लाने के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया।

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बैठक में मुख्य सचिव ने मातृ मृत्यु के विभिन्न कारणों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने भीलवाड़ा में हाल ही में हुई मातृ मृत्यु के मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा शाहपुरा सीएचसी के स्त्री रोग विशेषज्ञ और एएनएम से सीधे संवाद कर घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित चिकित्सकों से चर्चा कर उपचार व्यवस्था एवं प्रोटोकॉल की समीक्षा भी की।

वी. श्रीनिवास ने ‘प्रसव सखी’ पहल के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की तथा इसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं को दी जा रही सहायता एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। उन्होंने अलवर, भरतपुर एवं दौसा के सीएमएचओ तथा आरसीएचओ से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान, उपचार तथा फील्ड स्तर पर एएनएम द्वारा एनीमिया एवं हाईपरटेंशन के लक्षणों की निगरानी की जानकारी ली। बैठक में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित चिकित्सकों को उपचार प्रबंधन एवं प्रोटोकॉल के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में एनीमिया एवं हाईपरटेंशन के उपचार और प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जाए, ताकि पूरे प्रदेश में एक समान उपचार प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना सुनिश्चित हो सके। उन्होंने ब्यावर, चित्तौड़गढ़, बारां, झालावाड़ एवं सलूम्बर जिलों में एनीमिया और हाईपरटेंशन की स्क्रीनिंग एवं उपचार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में सर्जिकल प्रोटोकॉल, औषधि उपलब्धता तथा 104 एवं 108 एम्बुलेंस सेवाओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट कहा कि रक्त की उपलब्धता के अभाव में किसी भी गर्भवती महिला की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आवश्यकता वाले क्षेत्रों में विशेष रक्तदान शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही बीकानेर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर एवं कोटा मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के प्रसव प्रबंधन, आईसीयू सुविधाओं तथा उपचार प्रोटोकॉल की जानकारी ली।

प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बैठक में ‘प्रसव सखी’ पहल, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की एएनएम स्तर पर सूचीबद्धता, गंभीर एनीमिया को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा विभिन्न उपचार प्रोटोकॉल के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

 

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