Home राज्य राजस्थान सरकार की नई गाइडलाइन, फसल बीमा कंपनियों को नियम तोड़ना पड़ेगा...

राजस्थान सरकार की नई गाइडलाइन, फसल बीमा कंपनियों को नियम तोड़ना पड़ेगा महंगा

2
0
Jeevan Ayurveda

जयपुर
 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने बीमा कंपनियों पर सख्ती बढ़ा दी है। अब सर्वे में देरी, क्लेम लटकाने या नियमों की अनदेखी करने पर कंपनियों को जुर्माना और ब्याज दोनों चुकाने होंगे। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के निर्देश पर कृषि विभाग ने शुक्रवार को 80 पृष्ठों की नई गाइडलाइन जारी की। अब कटाई के बाद (पोस्ट हार्वेस्ट) नुकसान की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सर्वेयर नियुक्त करना होगा।

ऐसा नहीं करने पर प्रति घटना 20 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। सर्वेयर नियुक्त होने के बाद 10 दिन में सर्वे पूरा करना अनिवार्य होगा। देरी होने पर प्रत्येक लंबित प्रकरण पर एक हजार रुपए का अतिरिक्त दंड लगेगा। यदि फसल कटाई प्रयोग (क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट) में बीमा कंपनी सह-पर्यवेक्षण नहीं करती है तो कृषि विभाग की रिपोर्ट अंतिम मानी जाएगी और कंपनी उस पर आपत्ति नहीं कर सकेगी।

Ad

21 दिन से अधिक देरी पर 12% ब्याज
यदि किसी किसान का बीमा प्रस्ताव निरस्त होने के बावजूद दावा प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रीमियम वापस नहीं किया जाता, तो बीमा कंपनी को संबंधित किसान का दावा चुकाना होगा। वहीं क्लेम भुगतान में 21 दिन से अधिक की देरी होने पर भुगतान की तिथि तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

सबलेट पर भी रोक
चयनित बीमा कंपनी अपना काम किसी दूसरी बीमा कंपनी, संस्था, ज्वाइंट वेंचर या बीमा एजेंट को सबलेट नहीं कर सकेगी। शिकायतों का निस्तारण तहसील, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से होगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पड़ताल: राजस्थान का 64% कृषि क्षेत्र अब भी फसल बीमा से बाहर
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर हजारों करोड़ खर्च होने के बावजूद राजस्थान का 64% कृषि क्षेत्र अब भी बीमा सुरक्षा से बाहर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के कुल कृषि क्षेत्र का केवल 36% हिस्सा ही बीमित हो सका। सबसे अधिक कवरेज चूरू में 77% रही, जबकि धौलपुर में यह महज 5%, करौली में 7% और दौसा में 9% दर्ज की गई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्ष में किसानों को 18,189.16 करोड़ का बीमा दावा मिला। सबसे अधिक भुगतान चूरू (2,459.63 करोड़), हनुमानगढ़ (2,253.59 करोड़), जोधपुर (1,570.94 करोड़), जालोर (1,392.02 करोड़), नागौ (1,287.89 करोड़) और बीकानेर (1,101.64 करोड़ रुपए) में हुआ। वहीं राजसमंद (4.66 करोड़), धौलपुर (7.23 करोड़) और करौली (9.51 करोड़) सबसे पीछे रहे।

बीमा कंपनियों ने कमाए 8,568.40 करोड़ रुपए
पिछले पांच वर्षों में योजना के तहत 26,757.56 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा हुआ। इसमें किसानों का अंश 4,650.78 करोड़, राज्य सरकार का 11,253.68 करोड़ और केंद्र सरकार का 10,853.10 करोड़ रुपए रहा। इसी अवधि में किसानों को 18,189.16 करोड़ रुपए का क्लेम मिला। ऐसे में बीमा कंपनियों ने 8,568.40 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया।

फसल बीमा से दूरी के प्रमुख कारण
-क्लेम मिलने में देरी
-नुकसान के मुकाबले कम मुआवजा
-सर्वे और आकलन पर विवाद
-जागरूकता का अभाव
-स्वैच्छिक व्यवस्था के बाद गैर-ऋणी किसानों की घटती भागीदारी

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here