जयपुर
राजस्थान सरकार द्वारा खोले गए तबादलों की शुक्रवार को अंतिम तिथि है। ऐसे में गुरुवार को अधिकांश विभागों में तबादला सूचियों को अंतिम रूप देने के लिए रात तक तैयारी चलती रही। हालांकि शिक्षा विभाग के अलावा किसी भी बड़े विभाग की सूची जारी नहीं हो सकी। शिक्षा विभाग ने दूसरे दिन प्रतिनियुक्ति के आधार पर 919 व्याख्याताओं, प्राचार्यों और उप प्राचार्यों के तबादला आदेश जारी किए। बुधवार को शिक्षा विभाग ने करीब 8,300 शिक्षकों व अन्य कार्मिकों के तबादले किए थे।
तबादलों के अंतिम दिन से पहले राजधानी में कार्मिकों की भागदौड़ भी तेज रही। सुबह से मंत्री आवासों और सचिवालय में तबादला चाहने वाले कर्मचारी व अधिकारी आवेदन लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मिलते रहे। वहीं, विभागों में भी अधिकारी तबादला सूचियों को अंतिम रूप देने और सिफारिशों के निस्तारण में व्यस्त रहे, जिससे नियमित कामकाज की रफ्तार प्रभावित रही।
फिर तारीख बढ़ने की रही चर्चा
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी रही कि सरकार कहीं एक बार फिर तबादलों की अवधि नहीं बढ़ा दे। पहले तबादले 19 जून से 5 जुलाई तक खोले गए थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 जुलाई कर दिया गया। यदि शुक्रवार को अवधि नहीं बढ़ाई जाती है तो अंतिम दिन विभिन्न विभागों की बड़ी संख्या में तबादला सूचियां जारी होने की संभावना है।
डीओआइटी: तबादला सूची में टिप्पणी से मचा बवाल
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की सूचना सहायक संवर्ग की तबादला सूची गुरुवार को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही। 763 कार्मिकों की सूची में कई खामियां सामने आई। मामला सामने आने के बाद विभाग ने एक में तो गलती सुधार कर संशोधित सूची जारी कर दी, लेकिन बाकी तीन मामलों में वैसी ही स्थिति बनी रही। वायरल हुई पहली सूची में सबसे अधिक चर्चा एक कर्मचारी के ‘विशेष विवरण’ कॉलम में दर्ज ‘एमएलए का 0 खत्म करने के लिए’ जैसी टिप्पणी को लेकर रही। बाद में विभाग ने संशोधित सूची जारी कर इस टिप्पणी को हटा दिया। कुछ-एक कर्मचारियों के नाम दो बार दर्ज थे, एक का तबादला पुराने पदस्थापन पर ही दर्शा दिया गया।
भाजपा कार्यालय बना तबादला सिफारिशों का केंद्र, 24 हजार आवेदन पहुंचे
राज्य सरकार की तबादला प्रक्रिया के बीच भाजपा प्रदेश मुख्यालय इन दिनों सिफारिशी आवेदनों का बड़ा केंद्र बना है। पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा के साथ अब तक करीब 24 हजार तबादला आवेदन (ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों) प्रदेश कार्यालय तक पहुंच चुके हैं। इनमें सबसे अधिक आवेदन शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुल आवेदनों में से ज्यादातर आवेदन ऐसे हैं, जो भाजपा पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सिफारिश के साथ आए हैं। प्रदेश कार्यालय ने इन आवेदनों का वर्गीकरण कर संबंधित विभागों और मंत्रियों तक सूची पहुंचा दी है। कुछ मंत्रियों को प्रदेश कार्यालय बुलाकर भी आवेदनों की सूची सौंपी गई है, ताकि पात्र मामलों पर प्राथमिकता से विचार किया जा सके। इस प्रक्रिया की मॉनिटरिंग का जिम्मा मुख्य रूप से प्रदेश महामंत्री भूपेन्द्र सैनी और कैलाश मेघवाल के पास है।
छंटनी में इन मामलों को प्राथमिकता
-अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत पति-पत्नी
-एकल और विधवा महिला कर्मचारी
-असाध्य रोग से पीड़ित कर्मचारी
-माता-पिता से सैकड़ों किलोमीटर दूर पदस्थ अकेला पुत्र
-अन्य मानवीय एवं संवेदनशील परिस्थितियों वाले मामले









