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20 दिनों में परिवार के छह सदस्यों की मौत से हड़कंप, आर्गेमोन मिलावट की पुष्टि

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पलामू
 प्रखंड के सिक्का गांव में एक ही परिवार में लगातार हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार देर रात रिम्स में इलाजरत परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य लाखो देवी की मौत हो गई। इसके साथ ही पिछले 20 दिनों में इस परिवार में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।

वहीं परिवार का सातवां सदस्य सुनील मेहता गंभीर हालत में रिम्स में भर्ती है। परिवार का सबसे छोटा सदस्य अनुज मेहता का डेढ़ वर्षीय पुत्र भी बीमार है। परिवार में सबसे पहले 19 जून को कुलदीप मेहता की मौत हुई थी।

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इसके बाद 20 जून को उनकी बेटी बबीता कुमारी, 26 जून को बेटी इंदु कुमारी, 28 जून को बहू श्वेता कुमारी, 29 जून को बेटे नकुल मेहता और अब 7-8 जुलाई की रात लाखो देवी की मौत हो गई। पाटन के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार ने लाखो देवी की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरे गांव की लगातार निगरानी कर रहा है।

गांव का सर्वे कराया जा चुका है और अब तक इस परिवार के अलावा कोई अन्य व्यक्ति प्रभावित नहीं मिला है। एहतियात के तौर पर गांव में दोबारा स्वास्थ्य सर्वे कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौतों के वास्तविक कारण का पता बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

ड्रॉप्सी बीमारी की आशंका
स्वास्थ्य विभाग की जांच में पूरा परिवार ड्रॉप्सी (Dropsy) नामक बीमारी से पीड़ित पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2011 के बाद भारत में ड्रॉप्सी का यह पहला संदिग्ध मामला माना जा रहा है। विभाग फिलहाल इसी बीमारी के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहा है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि परिवार जिस सरसों तेल का इस्तेमाल कर रहा था, उसमें आर्गेमोन मेक्सिकाना का जहरीला तेल मिला हुआ था। रांची फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी ने तेल के नमूने में आर्गेमोन की मिलावट की पुष्टि की है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मौतों का अंतिम कारण विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही तय किया जाएगा।

क्या है आर्गेमोन मेक्सिकाना?
आर्गेमोन मेक्सिकाना एक कांटेदार खरपतवार है, जिसे पलामू क्षेत्र में कटैला या पीला धतूरा के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका तेल मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत विषैला होता है।

इसके सेवन से ड्रॉप्सी जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है, जिसमें शरीर में सूजन, हृदय और अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ता है। फूड टेस्टिंग लैब के अनुसार इसका उपयोग सामान्य खाद्य तेल के रूप में नहीं किया जा सकता और यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

 

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