Home अध्यात्म महाभारत के 5 बड़े छल: जिन्होंने बदल दी युद्ध की दिशा

महाभारत के 5 बड़े छल: जिन्होंने बदल दी युद्ध की दिशा

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महाभारत केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि यह धर्म और अधर्म, नीति और राजनीति, प्रेम और प्रतिशोध की जटिल गाथा है. इस महाकाव्य में कई ऐसे मोड़ आए, जहां युद्ध केवल शक्ति से नहीं बल्कि रणनीति और छल से भी लड़ा गया था. कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिन्हें इतिहास के सबसे बड़े धोखे या रणनीतिक चाल कहा जाता है. इन घटनाओं ने न सिर्फ युद्ध की दिशा बदली, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गहरे सवाल भी छोड़ दिए. आइए जानते हैं महाभारत के ऐसे ही 5 प्रमुख धोखों के बारे में.

1. द्रोणाचार्य और 'अश्वत्थामा मारा गया' का छल
गुरु द्रोणाचार्य महाभारत के सबसे अजेय योद्धाओं में से एक थे. जब वे कौरव सेना के सेनापति बने, तो पांडवों की हार लगभग तय मानी जाने लगी. गुरु द्रोणाचार्य की सबसे बड़ी कमजोरी उनका पुत्र अश्वत्थामा था. श्रीकृष्ण ने इसी कमजोरी का उपयोग करते हुए योजना बनाई थी. एक हाथी, जिसका नाम भी अश्वत्थामा था, उसे मार दिया गया था. इसके बाद युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य से कहा कि, 'अश्वत्थामा मारा गया…', और धीरे से जोड़ा, 'हाथी'.

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युधिष्ठिर के इस आधे-सच ने द्रोणाचार्य को तोड़ दिया था. उन्होंने शस्त्र त्याग दिए और ध्यान में लीन हो गए. उसी समय धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया था. यह घटना महाभारत के सबसे बड़े मनोवैज्ञानिक धोखों में गिनी जाती है.

2. चक्रव्यूह और अभिमन्यु की अन्यायपूर्ण हत्या
अभिमन्यु, अर्जुन का पुत्र, वीरता और साहस का प्रतीक माना जाता है. उसे चक्रव्यूह में प्रवेश करना आता था, लेकिन उससे बाहर निकलने की विधि नहीं पता थी. जब अर्जुन युद्धभूमि में नहीं थे, तब कौरवों ने चक्रव्यूह रचा. अभिमन्यु ने अकेले ही उसमें प्रवेश किया और कई महारथियों को परास्त किया था. लेकिन युद्ध के नियमों को तोड़ते हुए कौरवों ने मिलकर एक अकेले, घायल और निहत्थे अभिमन्यु पर हमला किया. उसे रथ से गिराया गया और अंततः उसकी हत्या कर दी गई. यह घटना महाभारत का सबसे क्रूर और शर्मनाक अध्याय मानी जाती है, जहां युद्ध की मर्यादा पूरी तरह टूट गई थी.

 3. जयद्रथ वध और सूर्यास्त का भ्रम
अभिमन्यु की मृत्यु के बाद अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली कि वह अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे, अन्यथा स्वयं अग्नि में प्रवेश कर लेंगे. कौरवों ने जयद्रथ की सुरक्षा के लिए कड़ा घेरा बना दिया. जब सूर्यास्त का समय नजदीक आया और अर्जुन असफल होते दिखे, तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से सूर्य को ढक दिया था. अंधकार छा गया और कौरवों ने समझा कि सूर्यास्त हो गया. जयद्रथ अपने रथ से बाहर आ गया. उसी क्षण सूर्य फिर प्रकट हुआ और अर्जुन ने उसका वध कर दिया. यह घटना युद्ध की सबसे चतुर रणनीतियों में गिनी जाती है, जिसमें भ्रम का उपयोग किया गया.

4. कर्ण का कवच-कुंडल छीनना
कर्ण, सूर्यपुत्र और महान दानवीर, जन्म से ही दिव्य कवच और कुंडल के साथ पैदा हुए थे, जो उन्हें अजेय बनाते थे. इंद्र को भय था कि कर्ण अर्जुन को पराजित कर सकता है. उन्होंने ब्राह्मण का रूप धारण कर कर्ण से उसका कवच और कुंडल दान में मांग लिए थे. दानवीर कर्ण ने बिना संकोच सब कुछ दे दिया, जबकि वह जानता था कि इससे उसकी शक्ति कम हो जाएगी. बदले में इंद्र ने उसे 'शक्ति अस्त्र' दिया, जिसे वह केवल एक बार उपयोग कर सकता था. यह घटना दिखाती है कि कैसे एक महान योद्धा छल और राजनीति का शिकार बना.

5. भीष्म पितामह और शिखंडी की आड़
भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था और वे युद्ध में अजेय थे. उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि वे किसी स्त्री पर शस्त्र नहीं उठाएंगे. श्रीकृष्ण ने इस प्रतिज्ञा को ही उनकी कमजोरी बना दिया. शिखंडी, जो पूर्व जन्म में अंबा थीं, को भीष्म के सामने खड़ा किया गया. भीष्म ने शिखंडी पर शस्त्र नहीं उठाए. उसी दौरान अर्जुन ने शिखंडी की आड़ से बाण चलाए और भीष्म को बाणों की शैया पर लिटा दिया था. यह घटना बताती है कि कभी-कभी धर्म की मर्यादा ही युद्ध में हार का कारण बन जाती है.

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