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ईरान-अमेरिका जंग में फंसा रेस्क्यू मिशन, सी-130 विमान गिरने का दावा, पायलट को बचाने पर दोनों देशों के अलग सुर

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 नई दिल्ली

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच एक रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। ईरान ने इसे अपनी जीत बताया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे बड़ी सैन्य सफलता करार दिया है।

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ईरान ने रविवार को दावा किया कि दक्षिण इस्फहान में अमेरिका को कड़वी हार का सामना करना पड़ा। यह बयान उस समय आया जब एक अमेरिकी एफ-15 विमान के दूसरे क्रू सदस्य को बचा लिया गया, जो विमान गिरने के बाद लापता हो गया था।

ईरान के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा कि इस घटना ने अमेरिकी सेना की कमजोरी को उजागर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनल्ड ट्रंप जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान एक सी-130 श्रेणी का विमान भी मार गिराया गया। जोल्फाघरी ने इसे ईरानी सेना की बहादुरी और साहस का उदाहरण बताया।

ट्रंप ने बताया बड़ी सफलता
जहां ईरान इसे अपनी जीत बता रहा है, वहीं डोनल्ड ट्रंप ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अमेरिकी सेना की बड़ी सफलता कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि घायल पायलट अब सुरक्षित है और यह मिशन अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी बचाव अभियानों में से एक है।

ट्रंप ने कहा कि इस अभियान में कई विमान और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दुश्मन के इलाके में जाकर दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग बचाना सेना की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन ईरान के आसमान में अमेरिका की ताकत और नियंत्रण को दिखाता है।

ऑपरेशन के दौरान टकराव
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 विमान को निशाना बनाया गया। कुछ तस्वीरों में रेगिस्तानी इलाके में धुआं उठता हुआ भी दिखाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय ईरानी लोगों ने भी अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर गोलीबारी की। इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं।
युद्ध का बढ़ता असर

इस संघर्ष का असर अब आम लोगों तक भी पहुंचने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य समेत कई अहम समुद्री रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध जून तक जारी रहा, तो दुनिया भर में 4.5 करोड़ और लोग भूख के संकट में फंस सकते हैं।

पहले से ही 32 करोड़ लोग खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। इस बीच मिस्र और पाकिस्तान जैसे देश कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं।

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