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‘औकात’ तक पहुंची बहस! विपक्षी टूट पर वीरेंद्र–चिराग में तकरार, अरुण ने पलटवार से गरमाया माहौल

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पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव में 35 सीटों पर सिमट गए महागठबंधन के विधायकों में कुछ के टूटकर एनडीए में आने को लेकर लोजपा-आर के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के एक बयान से शुरू बहस अब हैसियत पूछने और गिनाने की लड़ाई में बदल गई है। राजद के विधायक भाई वीरेंद्र ने चिराग की हैसियत पूछी थी, तो लोजपा-आर के सांसद अरुण भारती ने जवाब में चिराग की ताकत गिना दी है। अरुण भारती ने कहा है कि चिराग पासवान की हैसियत यह है कि उन्होंने राजद के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी यादव को सीएम-इन-वेटिंग बनाकर छोड़ दिया और राजद को 75 से 25 सीटों पर लाकर पटक दिया।
 
चिराग पासवान ने कई विपक्षी एमएलए के अपने संपर्क में होने का दावा करते हुए तीन दिन पहले पटना में कहा था- ‘कई ऐसे विधायक हैं, जिनको इस बात का अहसास है कि संभवतः एनडीए के साथ जुड़कर ही वो अपनी सोच या बिहार के विकास या अपने क्षेत्र के विकास को गति दे पाएंगे। ऐसे में कई विधायक गाहे-बगाहे हमलोगों के भी संपर्क में हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के साथ जुड़ना चाहते हैं, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व के साथ जुड़ना चाहते हैं। कब, कौन, किसके साथ जुड़ रहा है, ये मैं कह नहीं सकता, लेकिन विपक्ष जिस तरीके से पूरी तरह धराशायी हो चुका है। मुझे नहीं लगता कि इस डूबती नाव में कोई और अब रहना चाहेगा।’

चिराग पासवान के बयान की चर्ता करते हुए पत्रकारों ने बिहार विधानसभा के सत्र के पहले दिन जब राजद के विधायक भाई वीरेंद्र से सवाल किया तो वो चिराग पासवान की हैसियत पर सवाल उठाने लगे। भाई वीरेंद्र ने कहा- ‘चिराग पासवान की पार्टी के 19 जीते हैं। 2 मंत्री बने हैं। और उनके सब लोग हमारे संपर्क में हैं। जब जरूरत पड़ेगी तो हमलोग उनको….। चिराग पासवान की हैसियत क्या है। हैसियत क्या है कि वो हमारी पार्टी का एक इधर से उधर नहीं कर सकते हैं।’

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भाई वीरेंद्र के कटाक्ष का जवाब दिल्ली में संसद सत्र के दौरान चिराग पासवान के बहनोई और लोजपा-आर के सांसद अरुण भारती ने दिया। पत्रकारों ने भाई वीरेंद्र के बयान का जिक्र करके उनसे सवाल किया था। इस पर लोजपा-आर के नेता ने कहा- ‘बड़बोले नेता हैं बिहार के। चुनावी हार को पचा नहीं पा रहे हैं। हमारे नेता की हैसियत है कि एनडीए की संख्या को 125 से 202 पर ले आते हैं। हमारे नेता की हैसियत है 17 हारी हुई सीटों को जीत में बदल सकते हैं। उनके नेता को सीएम उम्मीदवार की जगह सीएम-इन-वेटिंग करके छोड़ सकते हैं। राजद को 72 से 25 पर ला सकते हैं। घमंड करना बिल्कुल गलत बात है। घमंड तो रावण का भी नहीं टिका था।’

 

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