Home राज्य जनसुराज ने तारापुर में झोंकी पूरी ताकत — डॉ. संतोष सिंह देंगे...

जनसुराज ने तारापुर में झोंकी पूरी ताकत — डॉ. संतोष सिंह देंगे सम्राट चौधरी को चुनौती

34
0
Jeevan Ayurveda

पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ अपनी रणनीति को तेज करते हुए तरापुर सीट से 48 वर्षीय चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। प्रशांत किशोर ने चौधरी की उम्र और शिक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। उन्होंने तरापुर में एक डॉक्टर को उम्मीदवार बनाकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।
 
मुंगेर जिले के पहाड़पुर गांव के निवासी डॉ. संतोष सिंह पिछले 12 वर्षों से चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं। वे तरापुर में बीते पांच सालों से अपना 10-बेड का निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं। 2011 में एमबीबीएस और उसके बाद दो एमडी डिग्रियां पूरी करने वाले सिंह के मरीजों में कभी तरापुर की पूर्व विधायक स्व. पार्वती देवी और छह बार के विधायक शकुनी चौधरी (सम्राट चौधरी के पिता) भी शामिल रहे हैं। हालांकि अब वे जनसुराज से जुड़ने के बाद चौधरी परिवार से दूरी बना चुके हैं।

तरापुर के फजलिगंज स्थित उनके नर्सिंग होम के बाहर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। सुबह 10 बजे से मरीजों को देखने के बीच वे चुनावी चर्चा भी करते हैं। डॉ. सिंह ने बात करते हुए कहा कि आसपास के 200 से अधिक गांवों से लोग इलाज के लिए आते हैं। उनकी परामर्श शुल्क 400 रुपये है, लेकिन गरीब मरीजों से वे शुल्क नहीं लेते।

Ad

सुबह 10.30 बजे उनकी पत्नी खुश्बू सिंह भी क्लिनिक पहुंचती हैं। वे चुनाव प्रचार में अपने पति की मदद कर रही हैं। खुश्बू कहती हैं, “शुरुआत में मैं उनके चुनाव लड़ने के फैसले के खिलाफ थी, लेकिन अब लोगों का सम्मान देखकर गर्व महसूस होता है।”

जनसुराज के तरापुर विधानसभा प्रभारी शुभम शुक्ला दिनभर की रणनीति पर चर्चा करते हैं। शुभम बताते हैं कि पार्टी का ढांचा दो हिस्सों में बंटा है। राजनीतिक इकाई और पेशेवर इकाई। वे बताते हैं, “हमारे पंचायत स्तर पर लोकल पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं, जो विधानसभा प्रभारी को रिपोर्ट करते हैं। एआई जिला प्रभारी को रिपोर्ट करता है और यह सिलसिला राज्य प्रभारी तक जाता है, जो स्वयं प्रशांत किशोर हैं।”

जनसुराज के कार्यकर्ता लोगों में ‘परिवार लाभ कार्ड (PLC)’ बांट रहे हैं। यह पार्टी का डेटा इकट्ठा करने और वादे साझा करने का तरीका है। कार्ड में कई घोषणाएं दर्ज हैं। जैसे कि हर परिवार को 20,000 मासिक सहायता राशि, 2,000 का मासिक पेंशन, महिलाओं को 5 लाख का ऋण और 15 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षा।

डॉक्टर संतोष सिंह कहते हैं, “मैं 2023 में भाजपा की जिला मेडिकल टीम से जुड़ा था, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की उदासीनता से निराश हुआ। 2024 में प्रशांत किशोर से मिला और तभी उन्होंने इशारा किया था कि मुझे तरापुर से उतारेंगे।” अब तक वे 25 पंचायतों का दौरा कर चुके हैं। उनका कहना है, “मैं केवल यही कहता हूं कि जाति और धर्म से ऊपर उठकर प्रशांत किशोर की सोच को एक मौका दें।”

दोपहर 1 बजे वे मुस्लिम बहुल गोरहो गांव पहुंचते हैं। यहां करीब 2,000 मतदाता हैं, लेकिन अभी तक कोई दूसरा उम्मीदवार प्रचार के लिए नहीं आया। सहयोगी अकील अख्तर बताते हैं, “भाजपा को यहां वोट नहीं दिखते और आरजेडी इसे अपनी जेब का इलाका मानती है।” इसके बाद वे अमैया गांव पहुंचते हैं, जहां ओबीसी यादव, कोइरी और कुर्मी समुदाय रहते हैं। बारिश के बीच वे घर-घर जाकर लोगों से समस्याएं पूछते हैं।

एक नशे में व्यक्ति से हुई झड़प पर वे हंसते हुए कहते हैं, “यही है बिहार में शराबबंदी की हकीकत।” उन्होंने कहा, “यह सम्राट चौधरी से लड़ाई नहीं, बल्कि प्रशांत किशोर के नए बिहार के विचार का बीज बोने की कोशिश है।” वे आगे कहते हैं, “मैंने आरामदायक जीवन छोड़ा है ताकि राजनीति को करीब से समझ सकूं। राजनीति का मतलब त्वरित लाभ नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश होना चाहिए।”

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here