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बाल विवाह मिटाने की दिशा में MP अग्रणी, जस्ट राइट्स संस्था का 2030 का लक्ष्य

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भोपाल
जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन संस्था ने भारत को वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य तय किया है। संस्था के संस्थापक भुवन ऋभु ने सोमवार को आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश इस दिशा में अग्रिम मोर्चे पर है।

संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 41 जिलों में अब तक 36,838 बाल विवाह रोके गए, 4,777 बच्चों को बाल तस्करी से मुक्त कराया गया, और 1200 से अधिक यौन शोषण पीड़ित बच्चों की मदद की गई।

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भुवन ऋभु ने कहा कि मध्य प्रदेश की सात करोड़ तीस लाख की आबादी में लगभग 40 प्रतिशत बच्चे हैं। इतनी बड़ी आबादी में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है, लेकिन राज्य ने इस दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह, बाल तस्करी और यौन हिंसा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और नागरिक समाज ने मिलकर तेजी से कार्य किया है। संस्था ने 2023 से अगस्त 2025 तक के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं।

भुवन ऋभु ने यह भी याद दिलाया कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य था, जिसने बच्चियों के साथ दुष्कर्म पर मौत की सजा का प्रावधान किया था। अब वही सख्ती बाल विवाह के मामलों पर भी दिखाई जानी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA) एक धर्मनिरपेक्ष कानून है, जो बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसे धार्मिक विश्वासों या पर्सनल लॉ से कमतर मानना बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होगा।

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