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भारत की नजरें नए डब्ल्यूटीसी चक्र की सकारात्मक शुरूआत पर होगी, ताकि वे तीसरी बार फाइनल में पहुंचे

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लीड्स
भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों के सीरीज़ की शुरूआत हेडिंग्ले के लीड्स टेस्ट से हो रही है। यह दोनों टीमों के लिए नए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) चक्र की भी शुरूआत होगी। भारत पहले दोनों डब्ल्यूटीसी चक्र के फाइनल में पहुंचा था, लेकिन पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज और फिर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (बीजीटी) में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद वे लगातार तीसरा फाइनल खेलने से चूक गए। अब भारत की नजरें नए डब्ल्यूटीसी चक्र की सकारात्मक शुरूआत पर होगी, ताकि वे तीसरी बार फाइनल में पहुंचे।

भारत के लिए यह ना सिर्फ नए डब्ल्यूटीसी चक्र की शुरुआत है बल्कि नए टेस्ट युग की भी शुरूआत है। विराट कोहली, आर अश्विन और रोहित शर्मा की अनुभवी टेस्ट तिकड़ी के संन्यास लेने के बाद भारत की यह पहली पूर्ण टेस्ट सीरीज है। इसके अलावा इस टीम में पिछले कुछ इंग्लैंड दौरों पर शानदार प्रदर्शन करने वाले अनुभवी मोहम्मद शमी भी नहीं हैं।

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रवींद्र जडेजा 19-सदस्यीय भारी भरकम दल के एकमात्र सदस्य हैं, जिनके नाम 60+ टेस्ट मैचों का अनुभव है, जबकि टीम की कमान युवा शुभमन गिल के पास है। टीम का बल्लेबाजी क्रम एकदम नया है और सलामी बल्लेबाजी से शुरूआत कर तीसरे नंबर पर आने वाले गिल अब कोहली की जगह नंबर चार पर खेलने के लिए तैयार हैं। इसका मतलब यह भी है कि करूण नायर की लगभग आठ साल बाद टेस्ट टीम में वापसी होगी, वहीं साई सुदर्शन को भी डेब्यू का मौका मिल सकता है। बीजीटी के पांच में से चार टेस्ट मैचों में पारी की शुरूआत करने वाले केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल अब भारत के नए स्थायी टेस्ट सलामी बल्लेबाज होंगे।

वहीं इंग्लैंड की बात करें तो इंग्लैंड के लिए पिछला डब्ल्यूटीसी चक्र बहुत निराशाजनक रहा था और 22 में से 10 टेस्ट हारकर वह पांचवें स्थान पर रहे थे। ‘बैजबॉल’ उनके लिए पिछले चक्र में बिल्कुल भी काम नहीं किया था और वे भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी टेस्ट सीरीज हारे थे, जबकि एशेज में भी उन्हें अपने घरेलू सरजमीं पर 2-2 के ड्रॉ का सामना करना पड़ा था। उनका बल्लेबाजी क्रम तो अनुभवी है और जेकब बेथेल की जगह ऑली पोप को एकादश में प्राथमिकता देकर उन्होंने दिखाया है कि वे फिलहाल अनुभव को ही तवज्जो देंगे। लेकिन जो रूट को छोड़कर उनके अधिकतर बल्लेबाजों में निरंतरता और फॉर्म की कमी है।

वहीं इंग्लैंड का गेंदबाजी आक्रमण उनके बल्लेबाजी क्रम जितना अनुभवी नहीं है। मार्क वुड और जोफ्रा आर्चर अब भी चोट के कारण बाहर हैं, जबकि ऋषभ पंत ने कहा कि जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड का इस बार ना होना, उनके लिए “निश्चित रूप से” फायदे का सौदा है। टीम को अपने सबसे अनुभवी गेंदबाज क्रिस वोक्स से बड़ी उम्मीदें होगी, जिन्होंने भारत के पिछले इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ एक मैच खेला था, लेकिन सात विकेट लिए थे।

भारत ने जनवरी के बीजीटी के बाद कोई भी टेस्ट मैच नहीं खेला है। बीजीटी में उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3-1 से हार का सामना करना पड़ा था। इसके पहले उन्हें घर पर भी न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में 3-0 की शर्मनाक हार मिली थी।
वहीं इंग्लैंड ने हाल में ही जिम्बाब्वे को इकलौते टेस्ट में पारी से हराया था, जबकि न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भी उन्होंने विदेशी धरती पर 2-1 से सीरीज जीत दर्ज की थी। कुल मिलाकर हालिया फॉर्म और घरेलू परिस्थितियों का लाभ फिलहाल तो इंग्लैंड के साथ है।

जब ये दोनों टीमें पिछले साल भारत के खिलाफ भारत में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने उतरी थीं, तो पहले टेस्ट में मिली अप्रत्याशित हार के बाद भारत ने शानदार वापसी की थी और सीरीज को 4-1 के बड़े अंतर से जीता था। वहीं पिछली बार दोनों देशों के बीच इंग्लैंड में हुई पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर रही थी, लेकिन सीरीज के बड़े हिस्से पर भारत का दबदबा कायम था।

 

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