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Ram Mandir Trust: भर्ती में गड़बड़ी मिली तो नहीं मिलेगी राहत, सिफारिश वाले कर्मचारियों पर ट्रस्ट सख्त

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 अयोध्या

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जारी है जो हर दिन नए मोड़ ले रही है. इस सब के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने उन कर्मचारियों की नियुक्तियों की समीक्षा शुरू कर दी है, जिन्हें निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के बजाय सिफारिश के आधार पर नियुक्त किया गया था. जांच में यदि किसी नियुक्ति में नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। 

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नियुक्तियों की प्रक्रिया जांच के दायरे में
बताया जा रहा है कि यह फैसला हाल ही में सामने आए कथित दान चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है. इस मामले के बाद ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई स्तरों पर समीक्षा कर रहा है. इसी क्रम में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई गई है। 

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में सभी नियुक्तियां केवल तय नियमों और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार ही हों. इसके लिए पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह देखा जा रहा है कि किन कर्मचारियों की भर्ती नियमानुसार हुई तथा किन मामलों में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। 

सिफारिश से भर्ती कर्मचारियों की जांच
जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट उन सभी नियुक्तियों का ब्योरा जुटा रहा है, जिन पर सिफारिश या अन्य माध्यमों से भर्ती किए जाने के आरोप लगे थे. यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों को सेवा से हटाने सहित अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं। 

ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का मानना है कि राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय महत्व के धार्मिक स्थल के संचालन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. इसी उद्देश्य से प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह नियमबद्ध बनाने पर जोर दिया जा रहा है। 

हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन माना जा रहा है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे इन कदमों को मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 

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