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बाघ अभ्यारण्यों से ही जंगल बचे रहे हैं, बाघों के साथ जल, जंगल और ज़मीन बचाने के हों प्रयास- राज्यपाल

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जयपुर
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि बप्पा रावल के नाम पर ही रावल पिंडी बना हुआ है। वह मेवाड़ के ऐसे पराक्रमी योद्धा थे जिन्होंने अरब से आए मीर कासिम को ईरान तक खदेड़ा। उन्होंने राजस्थान को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यहां सर्वाधिक बाघ अभ्यारण्य होने के साथ ही, प्रकृति संरक्षण परंपराएं भी जीवंत हैं। उन्होंने बाघों के साथ जल, जंगल और ज़मीन बचाने के लिए भी सबको मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

श्री बागडे गुरुवार को जवाहर कला केंद्र में जयपुर टाइगर फेस्टिवल के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बाघ उत्सव में आयोजित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और वन, वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित किया।

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राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि बाघों के होने से ही पारिस्थितिकी संतुलन बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती मनुष्य आबादी के साथ ही बाघों के प्राकृतिक आवास तेजी से संकुचित हो रहे हैं। उन्होंने बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता का प्रसार किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने  कहा कि बाघ अंब्रेला स्पेसिस है। वह रहेगा तभी जंगल और जंगली जीव सुरक्षित रह सकते हैं। इसी से पर्यावरण संरक्षण बना रहेगा। उन्होंने कहा कि देश में बाघ अभ्यारण्य बनने से ही जंगल बचे रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान भक्ति और शक्ति का ही प्रदेश नहीं है, गौ पालन का भी सबसे बड़ा स्थान है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में राजस्थान देशभर में दूसरे स्थान पर है। गौ पूजा, गौशाला स्थापना में राजस्थान अग्रणी है। उन्होंने बाघ को विश्व का बहुत सुंदर और शक्तिशाली जीव बताते हुए कहा कि विश्व के 75 प्रतिशत बाघों की संख्या अकेले हमारे देश में हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के रणथम्भौर नेशनल पार्क, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व व सरिस्का टाइगर रिजर्व को अच्छी श्रेणी का टाइगर रिजर्व माना गया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में कुल 160 बाघ हैं, जिनमें 144 जंगली और 16 कैप्टिविटी में हैं। रणथंभौर में सबसे ज़्यादा 71 बाघ हैं।

राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छ जल, भूमि उर्वरता में सुधार आदि के साथ ही जैव विविधता का संरक्षण बाघों की आबादी पर ही निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण के साथ पर्यटन का विकास भी इस तरह से हो कि वन्य जीवों को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचे। उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए जन चेतना का प्रसार करने का आह्वान किया।

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