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गुजरात:टेक्सटाइल क्षेत्र के कपड़ा कारखानों में दैनिक भत्ते पर काम करने लगे कारीगर

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अजीत कुमार पाण्डेय

कोरोना संक्रमण एवं लॉक डाउन होने चलते कारखानों में बंदी के दौरान सूरत में श्रमिकों/कामदारों के पलायन के बाद अनलॉक-1 लागू होते ही धीरे-धीरे कपड़ा कारखाने चालू हो रहें हैं।अब करीबन 15 से 20 प्रतिशत डाईंग-प्रिंटिंग मिलें भी शुरु हो गईं हैं।लेकिन कारखानों के पास काम पूरा नहीं है। जो कुछ पुराना स्टॉक पड़ा हुआ है,उसे धीरे-धीरे क्लियर किया जा रहा है।कुछ नये आर्डर भी अब पूरे किए जा रहें हैं।जो कामदार/श्रमिक लॉकडाउन में कोरोना और बेरोजगारी के डर से सूरत छोड़कर नहीं गये,उनके लिये अभी समय अच्छा चल रहा है।जहाँ फैक्टरी कारखानों ने अपने कारीगरों का उचित ख्याल रखा वहाँ कारीगरों की कमी नही हुई है।वहीं कई कारखाना मालिकों के पास कारीगरों की कमी है।कारखानों में दैनिक वेतन पर कारीगरों/श्रमिकों को काम दिया जा रहा है। रोजाना 500 से 700 रुपये वेतन दिया जा रहा है।
श्रमिक/कारीगरों भी इसी शर्त पर काम कर रहें हैं।क्योंकि रोज हाथ में पैसा आने पर वे अपने परिवार का पालन पोषण अच्छे ढंग से कर सकते हैं।
टेक्सटाइल क्षेत्र के सलाहकारों का कहना है कि रोजाना वेतन देना मिल मालिकों के लिये नुकसान का ही सौदा है।
इस सम्बंध में मोहित इंडस्ट्रीज के जनरल मैनेजर दिलीप गगरानी का कहना है कि श्रमिक उद्योग जगत एवं कारखानों फैक्टरियों के रीढ़ की हड्डी की तरह होतें हैं।उन्होंने कहा की कामदारों को उनके लिये दैनिक भत्ते के साथ ही राशन किट देकर भी काम शुरु करवाया गया है।
हालात ऐसे लग रहे हैं कि जब तक अपने प्रदेश गये श्रमिक/कामदार नही लौट आते हैं तब तक कारीगरों की किल्लत खत्म नहीं होगी।वैसे भी 25 से 30 प्रतिशत कामदार/श्रमिक अभी भी फैक्टरियों में मौजूद हैं।

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